भारत की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक *बेरोजगारी* है। इसी चुनौती से निपटने के लिए *सहायक रोजगार इंडिया* ने रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाया है। संस्था के संस्थापक सुनील कुमार का एक ही उद्देश्य है—भारत को बेरोजगारी की समस्या से मुक्त करना और हर घर में खुशहाली लाना।
उनका स्लोगन है – *”घर-घर रोजगार, हर घर खुशहाल”*, जिसका तात्पर्य है कि जब हर घर का कोई सदस्य रोजगार करेगा, तो उस घर में खुशहाली स्वतः आ जाएगी। इसी संकल्प को साकार करने के लिए संस्था देशभर में पंचायत स्तर पर *रोजगार केंद्रों* की स्थापना कर रही है।
इसी क्रम में 8 जून को *बिहार के भागलपुर जिले* की 20 पंचायतों में सहायक रोजगार इंडिया के रोजगार केंद्रों का उद्घाटन किया गया। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को ट्रेनिंग, जानकारी और मौके तीनों एक ही स्थान पर मिल सकेंगे।
इस बारे में *सहायक रोजगार इंडिया के जनरल मैनेजर अनिल कुमार* ने जानकारी देते हुए बताया कि, “रोजगार केंद्र वो स्थान होगा जहाँ पंचायत स्तर के युवक-युवतियां संस्था से ट्रेनिंग लेकर खुद भी रोजगार पा सकेंगे और साथ ही दूसरों को भी मार्गदर्शन दे सकेंगे।”
इन केंद्रों पर युवाओं को *सरकारी योजनाओं की जानकारी*, *रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया*, और *स्वरोजगार के विकल्प* समझाए जाएंगे। वहीं जो लोग तुरंत नौकरी चाहते हैं, उनके लिए संस्था देशभर में विभिन्न कंपनियों और संगठनों से साझेदारी करके उन्हें उपयुक्त रोजगार दिलाने का प्रयास करती है।
इन रोजगार केंद्रों के माध्यम से सहायक रोजगार इंडिया यह सुनिश्चित कर रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों तक भी विकास के समान अवसर पहुंचें और कोई भी बेरोजगारी के कारण पीछे न रह जाए।
संस्था का लक्ष्य है – *हर पंचायत में एक रोजगार केंद्र*, ताकि भारत का हर कोना आत्मनिर्भर बन सके और हर युवा अपने सपनों को पूरा कर सके।
सहायक रोजगार इंडिया एक ऐसी पहल है, जो केवल रोजगार नहीं देती, बल्कि लोगों के जीवन में आशा, आत्मनिर्भरता और सम्मान भी लाती है।
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