महंत डॉक्टर देवनायक दास बने ‘सहायक रोजगार इंडिया’ के आजीवन संरक्षक

महंत डॉक्टर देवनायक दास बने ‘सहायक रोजगार इंडिया’ के आजीवन संरक्षक

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धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे महंत डॉक्टर देवनायक दास को ‘सहायक रोजगार इंडिया’ का आजीवन संरक्षक नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति न केवल संस्था के लिए गर्व की बात है, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

महंत डॉक्टर देवनायक दास मुंगेर के प्रसिद्ध **कष्टहरणी गंगा घाट** के प्रमुख महंत हैं और साथ ही **ऋषि मुद्गल पीठ** के पीठाधीश्वर भी हैं। उनका जीवन धार्मिक साधना, समाजसेवा और सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन को समर्पित रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने एम.ए., पीएच.डी. और डी.लिट. जैसी प्रतिष्ठित उपाधियाँ प्राप्त की हैं, जो उनकी विद्वता और आध्यात्मिक गहराई को दर्शाती हैं।

‘सहायक रोजगार इंडिया’ से जुड़ते हुए उन्होंने कहा, “आज देश का युवा वर्ग कई बार केवल सही मार्गदर्शन के अभाव में पीछे रह जाता है। यह संस्था जिस समर्पण से बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ रही है, वह सराहनीय है।” उन्होंने इस प्रयास को **“समाज के लिए एक कल्याणकारी पहल”** बताते हुए यह भी जोड़ा कि आज देश में लाखों युवा ऐसे हैं, जो योग्य होने के बावजूद अवसरों से वंचित हैं। यदि उन्हें एक सक्षम मंच और दिशा मिले, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी योगदान दे सकते हैं।

महंत देवनायक दास ने युवाओं को एक अनूठी तुलना के माध्यम से प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “जिस प्रकार **बाबा बजरंगबली** को उनके सामर्थ्य का बोध कराने के लिए **जामवंत** ने मार्गदर्शन किया था, उसी प्रकार ‘सहायक रोजगार इंडिया’ भी युवाओं को उनका हुनर और क्षमताओं का एहसास कराकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे रही है।”

उन्होंने संस्था द्वारा दी जा रही **रोजगार से जुड़ी जानकारी**, **प्रशिक्षण कार्यक्रम**, और **मार्गदर्शन** को एक **“प्रेरणादायक मिशन”** की संज्ञा दी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मंच के माध्यम से अनेक युवा सशक्त होंगे और देश के उज्जवल भविष्य की नींव रखी जाएगी।

‘सहायक रोजगार इंडिया’ के लिए यह अवसर भी विशेष है, क्योंकि एक आध्यात्मिक, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में महंत देवनायक दास का मार्गदर्शन संस्था के लिए नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगा।

इस महत्वपूर्ण नियुक्ति से यह स्पष्ट है कि जब आध्यात्मिक नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व एक साथ मिलते हैं, तो उसका प्रभाव दूरगामी और कल्याणकारी होता है।

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