मेजर जनरल अनुज माथुर ने ली सहायक रोजगार इंडिया की आजीवन सदस्यता, युवाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल को बताया सराहनीय
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अनुज माथुर, वीएसएम, भारतीय सेना के एक प्रतिष्ठित अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने अपने सैन्य जीवन में अनेक अद्वितीय योगदान दिए हैं। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र रहे मेजर जनरल माथुर को जम्मू और कश्मीर राइफल्स की 10वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था। उन्होंने भारतीय सेना में कई दशकों तक सेवा दी और देश की सुरक्षा में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उनके योगदानों के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) से सम्मानित किया गया, जो उत्कृष्ट सेवा के लिए दिया जाता है।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी मेजर जनरल माथुर सक्रिय रूप से समाज सेवा और जागरूकता अभियानों में जुटे हुए हैं। वे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति जनजागरण फैलाने के लिए प्रयासरत हैं और उन्होंने हाल ही में एक वीडियो के माध्यम से कैंसर के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डाला।
अब उन्होंने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘सहायक रोजगार इंडिया’ की आजीवन सदस्यता ग्रहण की है। सदस्यता लेते हुए उन्होंने कहा, “सहायक रोजगार इंडिया जिस प्रकार से बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ रही है, यह एक बेहद सराहनीय पहल है। आज भी देश में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है, और ऐसे में इस तरह की संस्था का युवाओं को दिशा देना निश्चित रूप से समाज के लिए कल्याणकारी साबित होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि देश में लाखों युवा योग्य होने के बावजूद रोजगार के अवसरों से वंचित हैं। ऐसे समय में यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और प्लेटफॉर्म मिले, तो वे न केवल अपने लिए बल्कि राष्ट्र के विकास में भी योगदान दे सकते हैं। सहायक रोजगार इंडिया, विभिन्न क्षेत्रों में नौकरियों की जानकारी, प्रशिक्षण, और मार्गदर्शन के माध्यम से युवाओं को सशक्त बना रही है, जो अपने आप में एक प्रेरणादायक मिशन है।
मेजर जनरल माथुर का इस संस्था से जुड़ना केवल एक नाम मात्र की सदस्यता नहीं है, बल्कि यह उनके सामाजिक दायित्वों की एक सशक्त अभिव्यक्ति है। उनके अनुभव, नेतृत्व क्षमता और जनकल्याण की भावना निश्चित ही रोजगार के क्षेत्र में संस्था के प्रयासों को मजबूती प्रदान करेगी।
उनका मानना है कि सेवा केवल वर्दी में रहकर ही नहीं होती, बल्कि समाज के हर हिस्से में योगदान देने से ही सच्चे मायनों में राष्ट्रसेवा पूरी होती है। और यही सोच उन्हें आम व्यक्ति से अलग बनाती है।
