सहायक रोजगार इंडिया: एक संकल्प, एक बदलाव

सहायक रोजगार इंडिया: एक संकल्प, एक बदलाव



सहायक रोजगार इंडिया सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक ऐसा मिशन है जो उन सभी लोगों के लिए आशा की किरण बन चुका है जो या तो रोजगार की तलाश में हैं या जो लोगों को काम देने की क्षमता रखते हैं। इस संस्था के संस्थापक श्री सुनील कुमार का मानना है कि हमें सिर्फ काम करने वालों को नहीं, बल्कि काम देने वालों को तैयार करना चाहिए। उनका उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति मजबूरी में मजदूरी न करे, बल्कि सम्मान के साथ जीवन यापन कर सके।

मजदूर दिवस पर श्री सुनील कुमार ने अपने जीवन के संघर्षों को साझा करते हुए कहा कि यह दिन उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। वे उन कठिन दिनों को आज भी नहीं भूल पाए जब वे ईमानदारी से काम करने के बावजूद अपनी मेहनत की मजदूरी पाने के लिए लोगों के पीछे-पीछे घूमते थे। कभी कहा जाता था कि कल आना, कभी परसों। ना कोई सुविधा थी, ना सुरक्षा। उन हालातों ने उन्हें तोड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

इन परिस्थितियों से जूझते हुए उन्होंने ठान लिया कि अब और किसी को ऐसे दौर से नहीं गुजरना पड़ेगा। इसी सोच ने ‘सहायक रोजगार इंडिया’ को जन्म दिया। यह प्लेटफार्म उन सभी लोगों की सहायता करने का प्रण ले चुका है जो आज भी मजदूरी को मजबूरी समझ कर जी रहे हैं। संस्था का उद्देश्य है – उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें उनके अधिकार दिलाना, और समाज में उनका सम्मान बढ़ाना।

सुनील कुमार का स्पष्ट संदेश है: “मजदूर बनो, लेकिन मजबूर मत बनो।” उन्होंने लोगों को आगाह किया कि अगर आपने अपनी आंखें नहीं खोलीं और समय रहते जागरूक नहीं हुए तो यह दुनिया आपको लूट लेगी। इसीलिए ज़रूरी है कि हर इंसान खुद की पहचान करे, अपने हुनर को पहचाने और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए।

सहायक रोजगार इंडिया हर कदम पर साथ देने को तैयार है – चाहे वो प्रशिक्षण हो, रोजगार से जुड़ाव हो या कानूनी सहायता। यह संस्था एक पुल का काम कर रही है – काम करने वाले और काम देने वाले के बीच।

सुनील कुमार की सोच और संघर्ष आज हजारों लोगों की प्रेरणा बन चुके हैं। उनका सपना है एक ऐसा भारत जहाँ हर हाथ को काम मिले, और हर श्रमिक को उसका अधिकार। उनका नारा है – “अगर कोई परेशानी आए, तो घबराओ मत, हम तुम्हारे साथ हैं।”

सहायक रोजगार इंडिया के इस प्रयास को हर नागरिक का समर्थन चाहिए ताकि हम सब मिलकर एक आत्मनिर्भर और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण कर सकें।

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